Yogi-Kathamrut-Hindi-Book-PDF

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योगी कथामृत हिन्दी पुस्तक के बारे में अधिक जानकारी | More details about Yogi Kathamrut Hindi Book



इस पुस्तक का नाम है : योगी कथामृत | इस ग्रन्थ के लेखक/संपादक हैं : श्री श्री परमहंस योगानन्द | इस पुस्तक के प्रकाशक हैं : योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इंडिया | इस पुस्तक की पीडीऍफ़ फाइल का कुल आकार लगभग 17 MB है | इस पुस्तक में कुल 736 पृष्ठ हैं | आगे इस पेज पर "योगी कथामृत" पुस्तक का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इसे मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं.


Name of the book is : Yogi Kathamrut | Author/Editor of this book is : Shri Shri Paramhansa Yogananda | This book is published by : Yogoda Satsanga Society of India | PDF file of this book is of size 17 MB approximately. This book has a total of 736 pages. Download link of the book "Yogi Kathamrut" has been given further on this page from where you can download it for free.


पुस्तक के लेखकपुस्तक की श्रेणीपुस्तक का साइजकुल पृष्ठ
श्री श्री परमहंस योगानन्दआत्मकथा, अध्यात्म17 MB736



पुस्तक से : 

अत्यन्त मोहक सादगी से पूर्ण और आत्मोद्घाटन करने वाली जीवनियों में से एक.... ज्ञान का एक वास्तविक भण्डार.... जिन महान विभूतियों से इन पृष्ठों में भेंट होती है.... वे यादो में मित्रोंकी भांति लौटते हैं, गहन आध्यात्मिक ज्ञान से समृद्ध, और इन सभी महान्तम विभूतियों में से एक हैं, ईश्वरोन्मत्त, स्वयं लेखक.... अपूर्व.... एक महान् आत्मा lकी सुन्दर झलक। - डॉ. एना वॉन हेल्महोल्ट्ज़-फेलन, मिनेसोटा युनिवर्सिटी, यू. एस. ए.

 

योगानन्दजी की "आत्मकथा" का महत्त्व इस तथ्य के प्रकाश में बहुत अधिक बढ़ जाता है कि यह भारत के ज्ञानी पुरुषों के विषय में अंग्रेजीमें लिखी गयी गिनी-चुनी पुस्तकों में से एक है, जिसके लेखक महोदय न तो पत्रकार हैं और न कोई विदेशी, बल्कि वे स्वयं वैसे ही ज्ञानी महापुरुषों में से एक हैं - सारांश यह कि योगियों के विषय में स्वयं एक योगी द्वारा लिखी गयी यह पुस्तक है।

 

यह तथ्य है कि विविध दार्शनिक एवं अधिभौतिक आंदोलनों के प्रतिपादक अब परमहंस योगानन्दजी की शिक्षाओं की व्याख्या कर रहे हैं और इनको रचनात्मक रूप से भिन्न-भिन्न क्षेत्रोंमें प्रयोग में ला रहे हैं । यह न केवल उनकी शिक्षाओंकी व्यावहारिक उपयोगिता के महत्त्वकी ओर इंगित करता है, अपितु भविष्यमें इनको तनूकरण, विखण्डन और विरूपण से बचाने के उपायोंकी आवश्यकता की ओर भी ध्यानाकर्षित करता है।

 

 (नोट : उपरोक्त टेक्स्ट मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियां संभव हैं, अतः इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये.)


डाउनलोड लिंक :

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