निर्मला (प्रेमचंद) हिन्दी पुस्तक पीडीएफ | Nirmala (Premchand) Hindi Book PDF

            

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(चित्र केवल प्रतीकात्मक)


निर्मला (प्रेमचंद) हिन्दी पुस्तक के बारे में अधिक जानकारी | More details about Nirmala (Premchand) Hindi Book

इस पुस्तक का नाम है : निर्मला | इस ग्रन्थ के रचनाकार हैं : प्रेमचंद | इस पुस्तक की पीडीएफ फाइल का कुल आकार लगभग 0.5 MB हैं | पुस्तक में कुल 123 पृष्ठ हैं |

Name of the book is : Nirmala . The book is authored by: Munshi Premchand. Approximate size of the PDF file of this book is : 0.5 MB. This book has a total of 123 pages.

पुस्तक के लेखकपुस्तक की श्रेणीपुस्तक का साइजकुल पृष्ठ
मुंशी प्रेमचंदसाहित्य, कहानी, उपन्यास 0.5 MB123


पुस्तक से :

बाग में फूल खिले हुए थे. मीठी-मीठी सुगंध आ रही थी. चैत की शीतल मंद समीर चल रही थी. आकाश में तारे छिटके हुए थे. निर्मला इन्हीं शोकमय विचारों में पड़ी-पड़ी सो गई और आख लगते ही उसका मन स्वप्न देश में बिचरने लगा. क्या देखती है कि सामने एक नदी लहरें मार रही है और वह नदी के किनारे नाव की बाठ देख रही है. संध्या का समय है. अंधेरा किसी भयंकर जंतु की भांति बढ़ता चला आता है. वह घोर चिंता में पड़ी हुई है कैसे यह नदी पार होगी, कैसे पहुंचूंगी! रो रही है कि कहीं रात ना हो जाए, नहीं तो मैं अकेली यहां कैसे रहूंगी. एकाएक उसे एक सुंदर नौका घाट की ओर आती दिखाई देती है. वह खुशी से उछल पड़ती है और ज्यों ही नाव घाट पर आती है, वह उस पर चढ़ने के लिए बढ़ती है, लेकिन ज्यों ही नाव के पटरे पर पैर रखना चाहती है, मल्लाह बोल उठता है तेरे लिए यहां जगह नहीं है.

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