पाश्चात्य काव्यशास्त्र हिन्दी पुस्तक | Pashchatya Kavya Shastra Hindi Book PDF

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पाश्चात्य काव्यशास्त्र हिंदी पुस्तक के बारे में अधिक जानकारी | More details about Pashchatya Kavya Shastra Hindi Book

इस पुस्तक का नाम है : पाश्चात्य काव्यशास्त्र | इस पुस्तक के लेखक हैं : देवेंद्रनाथ शर्मा | पुस्तक का प्रकाशन किया है : मयूर पेपरबैक्स | इस पुस्तक की पीडीएफ फाइल का कुल आकार लगभग 534 MB हैं | पुस्तक में कुल 292 पृष्ठ हैं |

Name of the book is : Pashchatya Kavya Shastra. This book is written by : Devendra Nath Sharma. The book is published by : Mayur Paperbacks. Approximate size of the PDF file of this book is 534 MB. This book has a total of 292 pages.

पुस्तक के लेखकपुस्तक की श्रेणीपुस्तक का साइजकुल पृष्ठ
देवेंद्रनाथ शर्मासाहित्य534 MB292



पुस्तक से : 

यूनान को मुख्यतः तीन भागों में बांटा जा सकता हैं— उत्तरी, मध्यवर्ती और दक्षिणी भाग। ये तीनों ही भाग पहाड़ियों से भरे हैं। अतः यातायात की दृष्टि से ये सभी क्षेत्र दुर्गम रहे हैं। यही कारण रहा है कि पूरे यूनान में कभी भी कोई एक शासन कायम नहीं हो सका और छोटे-छोटे नगर- राज्यों का विकास हुआ। ये नगर और राज्य परस्पर स्वतंत्र तो थे ही इसके साथ ही ये शत्रु-भाव से भी ग्रस्त थे । इसलिए लड़ते रहते थे। भारत के इतिहास को ध्यान में रखें तो बात साफ हो जाएगी। जैसे मध्य युग में भारत में राज्य के बीच लड़ाइयां हुआ करती थी वैसे ही हालात यूनान का भी था।

 

जैसा कहा जा चुका है कि प्लेटो सुकरात के शिष्य थे। और शिष्य भी साधारण नहीं बल्कि अपूर्व मेघावी, पूर्णतः अनुगत तथा सर्वात्मना समर्पित थे | उन्होंने सुकरात के विचारों को ही नहीं बल्कि उनकी पद्धति और शैली को भी ग्रहण किया। अंतर केवल इतना ही है कि जो काम सुकरात प्रवचन के द्वारा किया करते थे, उसे प्लेटो ने लेखन के द्वारा किया । इसका एक लाभ यह हुआ कि उन्होंने जो कुछ कहा वह लिखित होने से स्थायी बन गया।

 

 

अरस्तू ने तीन प्रकार के कथानकों का उल्लेख किया है : ऐतिहासिक, काल्पनिक तथा आमुश्रुतिक। इन तीनों को वे दुःखांतक के लिए ग्राह्य मानते हैं। कसौटी केवल आनंदप्रदता की है। कथानक कोई भी हो सकता है, बशर्ते उसमें आनंद देने की क्षमता हो। यह चीज कवि की प्रतिभा पर निर्भर करती है।

 (नोट : उपरोक्त टेक्स्ट मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियां संभव हैं, अतः इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये.)


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